Principal's Desk

           

akhilesh kumar niranjan
                                                                                                
"जय बुन्देलखण्ड / जय वीरभूमि"         

प्रधानाचार्य की कलम से ...                      

शस्य- श्यालाम, विव्दानों बुंदेलखंड की जननी जन्मभूमि स्वर्गादपि  गरीयसी, सदैव से ही ऋषियों, मुनियों, वीरों,  वीरंनाओं, कवियों, विव्दानों,साहित्यकारों, स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों व खिलाड़ियों की जन्म एवं कर्मस्थली रही है । हमारा सौभाग्य है कि जहां कण- कण में हमारा जन्म हुआ। जगतगुरू के रूप में ख्यातिप्राप्त भारतवर्ष आज शिक्षा के पूर्ण विकास के आभव में पूर्णतया: विकसित नहीं हो सका । श्रीराम, क्रष्ण, इसामसीह, स्वामी रामक्रष्ण , विवेकानन्द, रहीम, कबीर, सूर तुलसी जैसे महान पुरूषों नें अपनी पवित्र वाणी से हमारे जनमानस को सिंचित किया है ।  जिन पर सम्पूर्ण राष्ट्र को गर्व हैं ।&nbsp आज शिक्षा के क्षेत्र मैं ज्यों-ज्यों हमारा देश विकसित राष्ट्रों की पंक्ति मैं अपना स्थान पाने की होड़ में है । वहीं विद्यार्थियों मैं नैतिक चेतना का क्षरण होता द्रष्टिगोचर हो रहा है । ऎसे वातावरण में विद्यार्थियों में विध्या-विनय विवेक की उपलब्धि नितान्त  आवश्यक है । साथ में अनुशासन की सर्वोपरिता भी । 

विध्यार्थी के जीवन में तीन युगों का संगम होता है । आतीत की उपलब्धियां, मान्यताओं और आस्थाओ के साथ इनके जीवन में उतरती है । वर्तमान की समस्यायें समाधान के लिये उसकी ओर देखती है फिर समाज की आशाओं और आकांक्षाओं के चित्र स्वप्न बनकर उसकी आंखो में बसते है । जीवन का यह काल (किशोरावस्था ) बड़ा महत्वपूर्ण होता है । स्वाभाविक रूप से एक विचार प्रवाह चल पड़ता है कि आचार्य क्या पढाये । छात्र क्या पढे । इस द्रष्टि से हमारा औध्योगिक संस्थान वर्तमान परिवेश में शैक्षिक वातावरण, अनुशासन, लक्ष्यों का निर्धारण करते हुये निरन्तर शैक्षिक द्रष्टिकोण से अपने परिपथ पर निरंन्तर अग्रसर है । संस्थान में अध्यापन का गुरूतर भर जिन सम्माननीय गुरूजनों के कंधों पर हैं, वे पूज्य गुरूजन वन्द स्तुत्य है । जिनकी लग्न, निष्ठा एवं परिश्रम से नगर के भावी होनहार विद्यार्थियों की सुसुप्त प्रतिभा को जाग्रत्कर उनमें नव चेतना का संचार कर रहे है ।  


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